शनिवार, 30 अक्टूबर 2010

मेरे अल्फाजों को झूठ मत समझना

मेरे  अल्फाजों  को  झूठ  मत  समझना,
याद  आती  है  बहुत  जल्दी  मिलने  कि  दुआ  करना,
जी  रहा  था  तुम्हारे  नाम  पर,
मर  जाऊ  तो  बेवफा  मत समझना ||

शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2010

लम्हे ये सुनहरे कल साथ हो ना हो

लम्हे  ये  सुनहरे  कल  साथ  हो  ना  हो ,
कल  में  आज  जैसी  बात  हो  ना  हो ,
यादों  के  हसीन  लम्हे  दिल  में  रहेंगे ,
तमाम  उम्र  चाहे  मुलाक़ात  हो  ना  हो ||

मंगलवार, 26 अक्टूबर 2010

रेत पे लिखना तो आदत है हमारी

रेत  पे  लिखना  तो  आदत  है  हमारी  इसीलिए  तो   सागर
से  दुश्मनी  है  हमारी ,
चाहे  वो  लाख  बार  आपका  नाम  मिटाए ,
आपको  भुलाना  तकदीर
नहीं   हमारी ||

रविवार, 24 अक्टूबर 2010

जब  कोई  ख्याल  दिल से  टकराता  है  दिल  ना  चाहकर
भी  खामोश  रह  जाता  है ,
कोई  सब  कुछ  कहकर  प्यार  जताता  है  तोह  कोई  कुछ  
ना कहकर  भी  प्यार  निभाता  है ||

शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2010

क्यूँ किसी कि ख़ामोशी मुझे खामोश कर जाती है

क्यूँ  किसी  कि  ख़ामोशी मुझे  खामोश  कर  जाती  है ,
क्यूँ  उसकी   उदासी  मुझे   उदास  कर  जाती   है ,
क्या  रिश्ता  है  उसका   मेरा  जो  मुझे   उसकी   याद  
हर  पल  आ जाती  है |

विजय पटेल का ब्लॉग © 2011 BY VIJAY PATEL